कोरोना से बचे तो भूख से मरे

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कोरोना से बचे तो भूख से मरे ,सम्पूर्ण लॉकडाउन

देश में फिर कोरोना का कहर अपने चरमसीमा पर है। पिछले साल की तरह ही सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाने की स्थिति आ चुकी है । पिछले साल भी लॉकडाउन में रोज कमाकर कर खाने वालों के लिए जीवन पर संकट उत्पन्न हो गया था वही स्थिति आज भी विद्यमान है । ऐसे में क्या सम्पूर्ण लॉकडाउन सही विकल्प है ?

कोरोना से बचे तो भूख से मरे

देश में संक्रमण के मामले और मौत का आकड़ा लगातार बढ़ रहा है । आज 4,12,262 नए केस मिले है , तो 3,980 लोगोंं ने जाने गवाँई है जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है और स्थिति ये है कि कल ये रिकॉर्ड भी टूट जाएगा । ऐसी स्थिति में जब राज्यों में संक्रमण अपने पूरे जोर में है । मिनी लॉकडाउन का असर ना के बराबर दिख रहा है तब देश से संपूर्ण लोकडाउन की मांग उठना लाज़मी है ।पर ये मांग वही लोग उठा रहे जिनके पास लॉकडाउन में खाने के लिए राशन है लेकिन हमारे ही देश में कई लोग ऐसे भी है जो सुबह कमाते हैं तभी रात में खुद को और अपने बच्चों को खाना खिला पाते हैं ।इन मज़दूर कामगारों की स्थिति पर विचार किये बिना ,इनकी समस्याओं का समाधान किये बिना सम्पूर्ण तालाबंदी सर्वथा अविवेकपूर्ण क़दम होगा ।

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