विश्व में सबसे प्रदूषित दिल्ली की हवा  : एक्यूआई 556

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विश्व के सबसे प्रदूषित 20 शहरों में भारत के 3  शहर शामिल ।

भारत में वायु प्रदूषण अपने चरम बिंदू पर पँहुच चुका है । जिसमें देश की राजधानी का प्रथम स्थान है । भारत का  दिल इतना अधिक प्रदूषित हो चुका होता कि वहाँ की हवा में साँस लेना रोजाना 15 सिगरेट पीने के बराबर है । प्रदूषण की स्थिति इतनी भयवाह है कि शीर्ष अदालत को दखल देकर वहाँ 2 दिन का लॉकडाउन लगवाना पड़ा ।

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BBC

दिल्ली के बाद कोलकत्ता और मुंबई की स्थिति सर्वाधिक चिन्ताजनक है ।  कोलकाता का एक्यूआई 177 और मुंबई का 169 है । देश के अन्य शहरों का एक्यूआई भी खतरे के निशान से अधिक है ।

जानलेवा स्तर तक बिगड़ चुकी हवा

भारत की हवा अब इतनी जहरीली हो चुकी है कि रोजाना इसके कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है । इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 2019 में वायु प्रदूषण के कारण भारत में कुल  16.7 लाख लोगों की असामयिक मृत्यु  हुई । 2015 यह आकड़ा 10 लाख था । 1990 से 2019 तक वायु प्रदूषण से मरने वाले लोगों की संख्या में 115 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं घरेलू वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या में 64 फ़ीसदी की कमी आई है ।

वायु प्रदूषण के कारण भारतीय व्यापार को हो रहा बड़ा नुकसान

डलवर्ग एंड एडवाइजर्स ने  क्लीन एयर फण्ड और भारतीय औद्योगिक परिसंघ( सीआईआई) की सहायता से एक रिपोर्ट तैयार की है । रिपोर्ट में  अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले वायु प्रदूषण के बुरे प्रभाव के विस्तृत जानकारी दी गई है । रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण के कारण 130 करोड़ कामगार  प्रतिवर्ष छुट्टी लेने के कारण   सालान 130 करोड़ यानी 1.3 बिलियन कार्यदिवस कम हो जाते हैं । जिससे प्रतिवर्ष 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर राजस्व का नुकसान होता है । भारत को वायु प्रदूषण के कारण प्रत्येक वित्तीय वर्ष में भारतीय व्यापार जगत को करीब 95 बिलियन (सात लाख करोड़ ) का घाटा सहना पड़ता है । जो कि भारत की कुल जीडीपी के 3% है । यह आंकड़ा भारत सरकार को प्राप्त होने वाले कर के 50 प्रतिशत है और भारतीय स्वास्थ्य बजट से डेढ़ गुना अधिक है ।

उच्चतम न्यायालय ने लिया संज्ञान

भारत में वायु प्रदूषण को लेकर चिंता से अधिक सियासत हो रही है । सरकारें प्रदूषण के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रही हैं । सरकार जवाबदेहि से बचने के लिए प्रदूषण का दोष किसानों के सर डालने की कोशिश में है । सरकारों के इस रवैया पर सर्वोच्च न्यायालय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा किसानों पर आरोप लगाने का फैशन हो गया है ।  पराली से केवल 20 फ़ीसदी प्रदूषण होता है । 80 फ़ीसदी प्रदूषण पटाखे , जलाने वाहनों और फैक्ट्रियों के धुएं और धूल से होता है ।

पीठ ने कहा दिल्ली में पांच सितारा होटल में बैठे लोग किसानों को दोषी ठहरा रहे हैं । उनकी दुर्दशा कोई नहीं समझता  । उनके पास समस्या का कोई वैज्ञानिक समाधान है तो वह लाए पीठ उसपर गौर करेगी ।  वायु प्रदूषण पर संज्ञान लेने वाले पीठ में  मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण,  जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं

कब समझेंगे लोग ?


सरकार की सतर्कता और न्यायालय की सक्रियता के बाद भी वायु गुणवत्ता का स्तर सुधार नहीं रहा है।  यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है । इस स्थिति का कारण जन जागरूकता में कमी भी है । लोग वायु प्रदूषण के खतरनाक परिणामों से वाकिफ तो हैं पर इसे सुधारने में अपना योगदान नहीं देना चाहते हैं । पटाखें का प्रयोग हो , अनावश्यक व्यक्तिगत वाहन का इस्तेमाल हो या फिर पेड़ों की कटाई हो जनता अपनी आदत में सुधार लाने को तैयार नहीं है ।



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