संसद का पांचवा दिन भी हंगामे से भरे होने के बावजूद, हुआ भारतीय अंटार्कटिका विधेयक पारित

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संसद के मानसून सत्र का पांचवा दिन भी रहा हंगामे भरा। दोनों सदनों में बार-बार विपक्ष के हंगामे के कारण फिर सदन के कामकाज को सोमवार तक स्थगित कर दिया गया । विपक्ष के हंगामे के बाद भी संसद ने लोकसभा में भारतीय अंटार्कटिका विधेयक पारित कर दिया गया ।

अंटार्कटिका में विधेयक पारित होने के बाद भारतीय कानून लागू होगा। अंटार्कटिका महाद्वीप में भविष्य में भारतीय अभियानों पर अंतरराष्ट्रीय कानून के बदले भारतीय कानून लागू होगा।

इस बिल को शुक्रवार के दिन लोकसभा में पारित किया गया था ।इस बिल में अंटार्कटिक महाद्वीप में शासन और पर्यावरण संरक्षण समिति बनाने और विभिन्न अभियानों के लिए परमिट के जरिए जाने वाले भारतीयों को नियमों को तोड़ने की स्थिति में जुर्माना और सजा का प्रावधान किया गया है।

बिल के प्रावधानों के मुताबिक विज्ञान मंत्रालय के सचिव इस समिति के अध्यक्ष होंगे ।अंटार्कटिका महाद्वीप दुनिया का सबसे बड़ा साफ पानी का स्रोत होने के साथ-साथ दुर्लभ जीव -जंतुओं का घर है।

दुनिया में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए 12 देशों ने अंटार्कटिका महाद्वीप का संरक्षित करने के लिए 1959 में संधि पर हस्ताक्षर किया । वहीं भारत ने 1981 में इस संधि पर हस्ताक्षर किया ।भारत संधि के चार दशक बाद इस महाद्वीप के लिए कानून ला रहा है। इस कानून के तहत अब शोध के लिए भी लेनी पड़ेगी पूर्वानुमती।

खुदाई ,उत्खनन और संसाधनों का संग्रह सिर्फ शोध के लिए सीमित रहेगा ।दूसरे जगहों से पशु-पक्षी, पेड़ -पौधे को भी अंटार्ककटिका में ले जाना प्रतिबंधित रहेगा।

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