पूर्वोत्तर के आग की आंच महाराष्ट्र तक कैसे पहुंची

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झूठे अफवाहों से झुलसा महाराष्ट्र

पिछले 2 दिनों से महाराष्ट्र की स्थिति चिंताजनक है। जिस तरह से प्रदर्शन की आड़ में हिंसा की गई उससे हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। अब प्रश्न यह है कि त्रिपुरा की आग आखिर महाराष्ट्र तक पहुंची कैसे? महाराष्ट्र में हुई हिंसा महज एक इत्तेफाक है या साजिश यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन सरकार और प्रशासन के बार-बार समझाने के बाद भी प्रदर्शनकारी अपनी मंशा में कामयाब हुए। सरकार बार-बार उग्र हुई भीड़ और हिंसक प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक साजिश बता रही है। अगर सरकार को यह साजिश लगती है तो फिर जुलूस और प्रदर्शन की इजाजत क्यों दी गई?

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त्रिपुरा से करीब 3हजार किलोमीटर दूर महाराष्ट्र में दो समुदायों के बीच जमकर हंगामा हुआ। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमले के विरोध में त्रिपुरा में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान मस्जिद को तोड़ने की झूठी अफवाह फैलाई गई जिसके विरोध में महाराष्ट्र में मुस्लिम संगठनो ने विरोध करने के लिए जुलूस निकाला। महाराष्ट्र में शुक्रवार को मुस्लिम संगठन रज़ा अकैडमी ने बंद बुलाया और 4 जिलों में जमकर तोड़फोड़ हुई।

इसका विरोध करते हुए बीजेपी और स्थानीय पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को बंद बुलाया और प्रदर्शन किया जिसके कारण अमरावती और मालेगांव में आगजनी पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की गई। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बीजेपी के जुलूस पर लाठीचार्ज किया और भीड़ को काबू में लाने के लिए आंसू गैस भी दागे। हालात कुछ काबू में हुए हैं अमरावती जिले में धारा 144 लगा दी गई है और इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है। स्थिति पूरी तरह से प्रशासनिक नियंत्रण में है यह कहना सही नहीं है क्योंकि अमरावती,नासिक,नांदेड और मालेगांव में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। महाराष्ट्र पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला है।

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महाराष्ट्र के नासिक,अमरावती,नांदेड़ और मालेगांव आदि कई जिलों में जमकर तोड़फोड़,आगजनी और उपद्रव हुआ। हिंसक स्थिति को कवर करने गए एक स्थानीय पत्रकार को भी उपद्रवियों ने नहीं छोड़ा जिससे उसकी मौत हो गई। महाराष्ट्र हिंसा पर त्रिपुरा सरकार ने कहा है कि-महाराष्ट्र में हिंसा झूठे अफवाह फैलाने से हुई जिसके कारण हिंसा भड़की और स्थिति अनियंत्रित हुई।

महाराष्ट्र की पूरी स्थिति के लिए कहीं ना कहीं स्थानीय प्रशासन भी जिम्मेदार है। प्रशासनिक ढिलाई के कारण ही इतनी बड़ी हिंसा हुई। अगर प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद होती तो कोविड प्रोटोकॉल के तहत इतनी बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा ना होती और प्रदर्शनकारी हिंसक नहीं होते। पूरे मामले में अब तक 11 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया जा चुका है, लेकिन इन पर कोई ठोस कार्रवाई होगी अभी यह कहना उचित नहीं है।

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