कर्नाटक का हिजाब विवाद

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कर्नाटक का हिजाब मामला दुनियाभर में बना मुद्दा 

बेंगलुरु : कर्नाटक के हिजाब विवाद अब देश ही नही पूरी दुनिया के लिए बड़ा मसला बन चुका है । पड़ोसी मुल्क और दुनिया की कई बड़ी हस्तियां इस पर टिप्पणी से नहीं चूक रही है ।

बुधवार को शांति नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई में इस मामले पर ट्वीट करते हुए भारत को नसीहत दी कि भारतीय मुसलमानों को हाशिए पर जाने से रोका जाए और उन्हें पढ़ाई से वंचित न रखा जाए हिजाब में लड़कियों को स्कूल जाने से रोकना भयावह है ।

गौरतलब है कि मलाला यूसुफजई का स्वयं अपनी किताब “आई एम मलाला” में हिजाब को नापसंद करने वाला बयान, हास्यप्रद से अधिक और कुछ नहीं है।

मलाला के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता सीपी रवि ने कहा मलाला हमारे आंतरिक मामलों में कैसे बोल सकती हैं । कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया अफगानिस्तान , ईरान , पाकिस्तान में हिजाब ना पहनने पर मुस्लिम लड़कियों की हत्या की जा रही है । पाकिस्तान में सिर्फ हिंदू होने के कारण हिंदू , सिख लड़कियों की हत्या की जा रही है । उन्होन इन वास्तविक मुद्दों पर कभी एक शब्द नहीं बोला ।

पड़ोसी देश पाकिस्तान भी इस मामले को उछाल कर विश्व मंच पर भारत की छवि खराब करने की पूरी कोशिश में है । अपने देश की वास्तविकता को भूलकर भारत का ये छोटा सा मसला वहां की मीडिया की बहस का मुद्दा बना हुआ है । पाकिस्तान के इस हरकत पर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि किसी भी संस्था में ड्रेस कोड अनुशासन गरिमा बनाए रखने संबंधी निर्णय को सांप्रदायिक रंग देना भारत की समावेशी संस्कृति के खिलाफ साजिश है । अल्पसंख्यकों पर जुल्म और जुल्म का जंगल बन चुका पाकिस्तान हमें सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता का ज्ञान दे रहा है ।

 

क्या है हिजाब विवाद

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Amrujala

पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में चल रहे कर्नाटक के हिसाब विवाद ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है । इस मामले पर अपनी टिप्पणी करते हुए । प्रियंका गांधी ने तो यहां तक कह दिया कि महिला बिकनी पहने या हिसाब उनकी पसंद है । इस मामले में किसी को सलाह देने का कोई अधिकार नहीं है। भारत का संविधान उससे कुछ भी पहनने की गारंटी देता है । इसलिए महिलाओं को प्रताड़ित करना बंद करें ।

यह मामला कर्नाटक के उड्डपी जिले से शुरू हुआ। जहाँ के एक  सरकारी महाविद्यालय में 19 जनवरी को छात्राओं को बुर्का पहनकर आने पर कक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया ।  इसके बाद कॉलेज के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गया । प्रदर्शन की प्रतिक्रिया में हिंदू छात्र  ने भी भगवा गमछा लहरा का प्रदर्शन किया । 


इसी बीच कर्नाटक सरकार ने 6 फरवरी को राज्य में शिक्षा एक्ट 1983 की धारा 133(2) लागू किया ।  जिसके अनुसार सभी सरकारी एवं प्राइवेट विद्यालयों के छात्र छात्राओं को कॉलेज द्वारा निर्धारित ड्रेस कोड पहनकर कॉलेज आना होगा ।


इसके बाद मामला और गरमा गया । कर्नाटक में कई जगहों पर झड़प हुई । कई जगहों से पथराव की खबरें आई   और देश और दुनिया के सियासतदार इसमें कूद पड़े । 


कर्नाटक की 6 मुस्लिम लड़कियों ने सरकार के  फैसले के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की । कोर्ट ने मामले में पर्सनल ला और संवैधानिक सवालों के मूल तत्व को देखते हुए इसकी सुनवाई के लिए बड़े पीठ का गठन किया ।


कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला आने तक स्कूल कॉलेज में धार्मिक पोशाक पहनकर जाने पर रोक लगा दी ।

इस विवाद की सुनवाई चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की अध्यक्षता में जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की तीन सदस्य पीठ कर रही है ।

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