कहीं जल प्रलय तो कहीं सूखे की मार

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बाढ़,बारिश और सूखे से जनजीवन बेहाल

वाराणसी: जब प्रकृति अपने आवेश में होती है तो बहुत ही खौफनाक मंज़र दिखाती है। कुदरत ने अपना कहर इस कदर बरपाना शुरू कर दिया है जिसकी चपेट में,सड़क पगडंडी, घर गृहस्थी और जानवर सभी हैं।चारों ओर सिर्फ जल ही जल है। बाढ़,बारिश,भूस्खलन और बरसते बादलों का ऐसा सितम जिसने पूरे मानव जीवन को तितर-बितर कर दिया है।

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जिस बेसब्री से हम मानसून का इंतजार करते हैं वह हमारे लिए कैसा विनाश लेकर आता है यह देश के कई हिस्सों से आ रही तस्वीरों से पता चलता है। दिल्ली से देहरादून और अरुणाचल से तमिलनाडु, गुजरात हो राजस्थान हो या मुंबई हर तरफ विनाश ही है। धरती सड़कें, धड़कते पहाड़,उफनती नदियां और पानी के सैलाब को देखकर ऐसा लग रहा है मानो प्रकृति आधुनिकता की ओर बढ़ रहे मानव समाज को खुलेआम चुनौती देती नजर आ रही है। अगर उसके वजूद से छेड़छाड़ किया गया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। प्रकृति के गुस्से में अब तक हजारों जिंदगियां तबाह हो चुकी है। ््

कुदरत का अनोखा खेल

इसे कुदरत का अनोखा खेल ही कहेंगे कि एक तरफ जहां जल सैलाब ने तांडव मचा रखा है तो दूसरी तरफ देश के ऐसे कई हिस्सें भी हैं जहां की जमीन पानी की एक बूंद के लिए तरस रही है।

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उत्तर प्रदेश के बांदा,बदायूं,वाराणसी समेत कई जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। यहां के लोग बारिश की आस में बैठे हैं। गर्मी और सूरज की तपिश लोगों को जला रही है लेकिन मौसम में कोई बदलाव नहीं है।

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