बजट की बारीकियां :  समझे कैसे होगा कृषि क्षेत्र का उद्धार

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लोक लुभावना नहीं जिम्मेदाराना बजट देगा अर्थव्यवस्था को मजबूती

सभी को उम्मीद थी कि चुनावी वर्ष होने के कारण बजट भी चुनावी होगा । बजट में देश की अर्थव्यवस्था से ज्यादा चुनावी उपहार पर ध्यान दिया जाएगा । लेकिन सरकार ने देश को महामारी के घाटे से उभारने वाला बजट संसद में रखा।  ये बजट आने वाले सालों के लिए भारत के अर्थव्यवस्था का आधार तय करने वाला है ।


बजट में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर  बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योजनाएं है ।

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jagaran .com

तकनीकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

बजट में देखा जा सकता है कि सरकार ने किस तरह तकनीकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया है । केंद्र वित्तीय वर्ष 2022 – 23 देश के दौरान किसानों को ड्रोन तकनीक ,रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती, सार्वजनिक निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है । कृषि और कृषक कल्याण योजनाओं का कुल बजट इस बार 1.24 लाख करोड़ रुपए रखा गया है । जो पिछले बजट की तुलना में करीब छह हजार करोड़  ज्यादा है ।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन


तिलहन की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत अभी खाद्य तेलों के आयात पर निर्भर रहता है। खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए इसकी खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है । इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन ( एनएमईओएस ) के शुरुआत की घोषणा  बजट में की है ।

अगले 5 वर्षों में इस मिशन के जरिए पैदावार को 1676 किलोग्राम/ हेक्टेयर बढ़ाकर कुल उत्पादन 54 .10 मिलियन टन करने का लक्ष्य है । इस मिशन के जरिए खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता 52% से घटाकर 32% करने का लक्ष्य है ।

तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है । इसके अंतर्गत अधिक धान उत्पादन से बंजर भूमि , अंतर फसलें,  गैर पारंपरिक राज्यों में सरसों और सोयाबीन मिशन तथा फसल विविधीकरण के जरिए बढ़ावा दिया जाएगा ।


वर्तमान में खाद्य तेलों की जरूरत पूरी करने के लिए भारत कच्चे पॉम आयल के लिए विदेशी निर्यात पर निर्भर रहता है जिस कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं ।

2023 होगा, मोटा अनाज वर्ष

भूजल संकट को देखते हुए सरकार ने 2023 को मोटा अनाज वर्ष घोषित कर दिया है । इसका अर्थ है कि  अब किसानों को मोटा अनाज पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा । जिससे मानव स्वास्थ्य के साथ ही मिट्टी के की सेहत भी बरकरार रहे ।

सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोटे अनाज की घरेलू खपत को  बढ़ाने के लिए उत्पादन से लेकर बिक्री तक में सहायता करेगी । मोटे अनाज कम पानी में पैदा हो जाते हैं । इसे उन जगहों पर बढ़ावा दिया जाएगा जहां पानी का संकट है । जिससे कि भूजल का दोहन कम हो और कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल भी रोका जा सके ।

कृषि तकनिकीकरण पर जोर

कृषि के डिजिटलीकरण के लिए बजट में 60 करोड़ का प्रावधान किया गया है । किसानों और कृषि संबंधित सूचनाओं को बेहतर आदान-प्रदान के लिए कृषि सूचना प्रणाली और सूचना प्रौद्योगिकी तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना को सुदृढ़ और प्रोत्साहित किया जाएगा ।

किसानों की आय दोगुना करने के मिशन के साथ-साथ आधुनिक आईटी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और इंटरनेट ऑफ रोबोट के उपयोग को शामिल किया जाएगा । किसानों को बेहतर तकनीक उपलब्ध कराने के साथ ही भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और कीटनाशकों के छिड़काव में मदद  के लिए ड्रोन तकनीक को प्रोत्साहन दिया जाएगा ।  माना जा रहा है कि इससे मजदूरी कम होने के साथ ही किसानों की आय बढ़ेगी ।

गंगा को निर्मल बनाएगी प्राकृतिक खेती

कृषि को लेकर की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक है गंगा किनारे 5 किलोमीटर तक प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना । सरकार गंगा के किनारे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देगी । पहले चरण में गंगा किनारों पर 5 किलोमीटर के दायरे में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा ।

इससे लाभ यह होगा कि गंगा किनारे रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को रोककर नदी को प्रदूषण से बचाने का प्रयास किया जाएगा ।  इससे गंगा को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा । उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश , झारखंड,  बिहार और पश्चिम बंगाल में इसे प्रसारित किया जाएगा ।

कृषि विशेषज्ञ निंरकार सिंह ने बताया की बजट के कृषि को लेकर
सबसे अहम प्राकृतिक या  रासायनिक खाद कीटनाशक रहित खेती से जुड़ा फैसला है। इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं । दुनिया रासायनिक खाद युक्त कृषि उत्पादों से दूरी बना रही है। प्राकृतिक कृषि उत्पादों के लिए अधिक खर्च करने के लिए तैयार है । दुनिया में प्राकृतिक उत्पादों का एक बड़ा बाजार तैयार हो रहा है । अगर  यह योजना  जमीन पर उतरी तो देश में खेती के तौर तरीके में प्राकृतिकजन्य बदलाव के साथ किसानों की आय में व्यापक बढ़ोतरी होगी ।

केन बेतवा नदी परियोजना


केन बेतवा नदी परियोजना में सरकार ने 5 नदियों को जोड़ने वाली परियोजनाओ की घोषणा की है । दमनगंगा -पींजाल,  तपती – नर्मदा, गोदावरी- कृष्णा,  कृष्णा – पेन्नार और  पेन्ना- कावेरी नदी को जोड़ने वाली परियोजना की रिपोर्ट फाइनल की गई है । जैसे ही संबंधित राज्यों के साथ सहमति बन जाती है । केंद्र सरकार इसे अमलीजामा पहनाने के लिए मदद उपलब्ध करा देगी ।

विशेषज्ञ की राय

कृषि विशेषज्ञ निरंकार सिंह का कहना है कि  बजट में कृषि क्षेत्र के प्रति सरकार की नई दृष्टि और इस क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की इच्छाशक्ति दिखाई देती है । इसमें किसानों की आय बढ़ाने और कृषि के पारंपरिक तरीके में बदलाव लाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं ऐसे प्रावधान स्वीकृत जमीन पर उतरने के बाद इस क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन हो सकता है ।


निरंकार सिंह ने बताया की  किसानों की हालत तभी सुधरेगी जब देश में गेहूं धान से इतर लोग ऐसे फसलों की खेती बड़े जिसकी मांग ज्यादा होने के साथ बाजार में कीमत ज्यादा है इसके अलावा खेती की लागत अहम सवाल है तिलहन, दलहन, फल- फूल , जड़ी बूटी की खेती किसानों की तकदीर बदल सकतीहैं  ।

सौजन्य अमर उजाला


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