सफेद रंग में छुपा मौत का काला कारोबार

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युवाओं के बीच ड्रग्स की बढ़ती लोकप्रियता,चिंताजनक

ड्रग्स मामले में आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से बॉलीवुड और उसका ड्रग्स कनेक्शन सुर्खियों में है। यह सिर्फ बॉलीवुड या आर्यन खान की बात नहीं है बल्कि जिस तरह से इस जहरीले नशे का सेवन युवाओं के बीच बढ़ रहा है,स्थिति अत्यंत ही चिंताजनक है।

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अफगानिस्तान की धरती से निकलकर पाकिस्तानी स्मगलरों तक नेपाल भूटान एवं म्यानमार होते हुए भारत के विभिन्न शहरों में पहुंचने तक। अफीम की पैदावार से गांजे की अवैध खेती तक,चरस के नशे से हेरोइन की लत,कोकेन से मॉरफिन, स्नैप से हशीश तक और नशे के अवैध कारोबारियों से नशे के आदी तक नौजवानों के रगों में जहर की तरह खुला है ड्रग्स। एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में हर दिन 21 लोगों की मौत का कारण ड्रग्स बना।

शरीर में कैसे काम करता है ड्रग्स

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जब कोई व्यक्ति ड्रग्स का सेवन करता है तो उसके दिमाग के न्यूरॉन्स सक्रिय हो जाते हैं। यह न्यूरॉन्स सक्रिय तो हो जाते हैं लेकिन प्राकृतिक तरीके से कार्य नहीं करते हैं जिसके कारण लोग सामान्य से अलग व्यवहार करने लगते हैं। नशा करने के बाद उस व्यक्ति की थकान चिंता और नींद तो खत्म हो जाती है लेकिन इनका दिमाग सामान्य या कुछ भी सोचने समझने की अवस्था में नहीं रहता। नशा इतना खतरनाक कि अगर इसके सेवन के आदि लोगों को ना मिले तब भी और मिले तब भी दोनों ही अवस्था में ये जानलेवा साबित होता है।

भारत में कैसे पहुंचता है नशे का अवैध कारोबार

एनसीआरबी द्वारा जारी एक रिपोर्ट की मानें तो देश में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से विभिन्न प्रकार के ड्रग्स की अवैध तस्करी की जाती है। अफीम भारत-पाकिस्तान, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर, गांजा नेपाल तथा एटीएस एवं एमडी जैसे ड्रग्स म्यानमार के रास्ते देश में पहुंचते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 30 हजार करोड रुपए तक के नशे का कारोबार अकेले भारत में होता है। स्मगलिंग के अलावा डार्कनेट के द्वारा भी ड्रग्स की सप्लाई की जाती है। एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 2020 में ही अवैध ड्रग्स तस्करी के लगभग 26560 मामले दर्ज हुए।

सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के कई ऐसे राज्य हैं जो ड्रग्स से प्रभावित हैं। बॉलीवुड और नामचीन हस्तियों के कारण जब-जब ड्रग्स पर चर्चा हुई है,महाराष्ट्र हमेशा सुर्खियों में रहा है। नशे का ये खेल केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है बल्कि भारत के कई राज्य इसकी चपेट में हैं। पिछले तीन वर्षों में देश में ड्रग्स का बाजार 455% बढ़ा है। पंजाब,हरियाणा,राजस्थान,उत्तर-प्रदेश,केरल,तमिलनाडु,गुजरात,बिहार एवं झारखंड ऐसे राज्य हैं जहां ड्रग्स का सेवन एवं अवैध तस्करी सबसे अधिक होती है। ड्रग्स मामले में केरल आबादी के हिसाब से सबसे आगे है। यहां 14.2% मौतें नशे के कारण होती हैं। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र,तमिलनाडु,त्रिपुरा,मिजोरम और आंध्र प्रदेश में भी ड्रग्स से मौत का भयावह आंकड़ा दर्ज है।

ड्रग्स के खिलाफ कितना सख्त है भारत का कानून

भारत में ड्रग्स से संबंधित किसी भी मामले की जांच एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) द्वारा की जाती है जिसका गठन 1986 में हुआ था। यह एनडीपीएस (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकॉट्रॉपिक सब्सटेंस) एक्ट 1985 के तहत ड्रग्स का सेवन अवैध तस्करी उसके निर्माण या खरीद-फरोख्त करने पर एक्शन लेती है।

एनडीपीएस एक्ट के अनुसार दो तरह के नशीले पदार्थ होते हैं नारकोटिक और साइकॉट्रॉपिक।

1-नारकोटिक-नींद लाने वाले ड्रग्स होते हैं जो प्राकृतिक तरीकों से बनते हैं।जैसे-चरस,गांजा,अफीम,हेरोइन,कोकेन मार्फिन आदि।

2-साइकॉट्रॉपिक दिमाग पर असर डालने वाले होते हैं जो केमिकल युक्त होते हैं। एलएसजी,एमडीएम,अल्प्राजाॅलम आदि टेबलेट्स,इंजेक्शन के रूप में प्रयोग किए जाते हैं।

ड्रग्स से जुड़े अपराध में पकड़े जाने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की मात्रा के आधार पर तीन तरह की सजा का प्रावधान है-

1-कम मात्रा में ड्रग्स का सेवन करने पर 1 साल की कैद या 10 हजार तक का जुर्माना या दोनों ही हो सकता है।

2-कमर्शियल क्वांटिटी या खरीद बिक्री के उद्देश्य से नशीले पदार्थ रखने पर 10- 20 साल की सजा या 1-2 लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

3-कम मात्रा या कमर्शियल क्वांटिटी के बीच की मात्रा में अपराध होने पर 10 साल की सजा या 1लाख तक का जुर्माना या दोनों दिया जा सकता है।

ड्रग्स या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ जानलेवा साबित होते है।ये हमारे स्वास्थ्य और शरीर दोनों के लिए ही हानिकारक है।नशा करने वाला व्यक्ति जीवन की मुख्यधारा से अलग कहीं हद तक अकेला हो जाता है इसलिए नशे के प्रयोग से बचें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।

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