भारत रुस साझेदार नहीं मित्र

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भारत रूस सम्बन्ध का नया अध्याय : पूरे हुए ट्रीटी ऑफ़ पीस फ्रेंडशिप एंड कोऑपरेशन के पांच दशक और सामरिक भागीदारी के दो दशक

नई दिल्ली: सोमवार को  भारत रुस रक्षा सहयोग की अवधि को 10 साल और बढ़ाते हुए दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधो का नये आयाम दिये ।

रक्षा समझौते समेत अफगानिस्तान की स्थिति तथा सीमा पर चीन की दादागिरी,  आतंकवाद,  नशा के कारोबारियों के खिलाफ जंग , संगठित अपराध तथा अन्य वैश्विक विषयों पर चर्चा हुई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हस्ताक्षर के साथ दोनों देशों के संबंधों की दृढ़ता को  2031 बड़ा दिया गया ।

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tv9भारतवर्ष

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद भारत और रूस के संबंधों के विकास की गति में कोई बदलाव नहीं हुआ है । दोनों देशों के बीच विशिष्ट राजनीतिक संबंध और मजबूत हुए हैं और अफगानिस्तान तथा अन्य वैश्विक मुद्दों पर हम लगातार संपर्क में हैं ।

पुतिन ने कहा हम भारत को एक बड़ी ताकत, एक दोस्ताना मुल्क और समय की कसौटी पर खरे उतरने वाले दोस्त के रूप में देखते हैं ।हमारे संबंध आगे बढ़ रहे हैं और मेरी निगाह भविष्य पर है । दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच शिखर बैठक दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई ।

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ANI

रक्षा क्षेत्र में तीन अहम समझौते

भारत और रूस में सबसे महत्वपूर्ण समझौता भारत में 5 लाख एके-203 असॉल्ट राइफलो  के निर्माण का है ।  इसका निर्माण उत्तर प्रदेश के अमेठी में भारत रूस  संयुक्त उद्यम वाली कम्पनी  इंडो -रशिया राइफल प्राइवेट लिमिटेड करेगी ।  

दूसरे मुख्य समझौते के तहत क्लाशनिकोव सीरीज के छोटे हथियारों के उत्पादन के बारे में फरवरी 2019 में हुए समझौते में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है ।

सैन्य एवं सैन्य तकनीक सहयोग के क्षेत्र में भारत रूस अंतर सरकारी आयोग (आईआरआईजीसीएमएंडएमटीसी )के प्रोटोकॉल में बदला हुआ ।

आर्थिक क्षेत्र में  महत्वपूर्ण लक्ष्य

राष्ट्रपति पुतिन से वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश रक्षा के अलावा आर्थिक क्षेत्र में भी साथ-साथ आगे बढ़ने के लिए दीर्घकालीन दृष्टि को अपना रहे हैं।

इस क्रम में हमने 2025 तक 30 अरब डॉलर  के व्यापार और 50 अरब डालर के निवेश का लक्ष्य रखा है । उन्होंने कहा कोरोना के खिलाफ जंग में दोनों देशों के बीच सहयोग रहा है ।

दोनों देशों के बीच हुई टू प्लस टू वार्ता

भारतीय प्रधानमंत्री  मोदी और रुसी राष्ट्रपति पुतिन के बैठक के पहले दोनों देशों के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के बीच टू प्लस टू वार्ता हुई ।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस को भारत का पुराना,व खास विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदार बताया रक्षा मंत्री ने बिना चीन का नाम लिए उत्तरी सीमा उसकी हरकतों को रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोएगु के समक्ष रखा । और बताया कि भारत मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनता की अंदरूनी ताकत के बल पर इन चुनौतियों का सामना बखूबी कर रहा है ।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने टू प्लस टू बैठक में  एस-400 मिसाइल खरीद मामले में अमेरिका के दबाव में ना आने पर भारत की तारीफ की ।

रूसी विदेश मंत्री लावरोव और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच कई मामलों पर वार्तालाप हुआ जो की अफगानिस्तान के सत्ता परिवर्तन , आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद समेत कई चुनौतियों का सामना करने की दिशा में अहम कदम साबित होगा ।

एस जयशंकर ने कहा बहुध्रुवीय विश्व को नया संतुलन देने में भारत और रूस की कूटनीति और सामरिक साझेदारी महत्वपूर्ण है ।

भारत और रूस के संबंध का इतिहास

भारत और रूस के संबंध का इतिहास काफी पुराना है । एक गुटनिरपेक्ष देश होते हुए भी शीत युद्ध काल से ही सन 1971 भारत और रूस में मित्रता व शांति के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे । तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस समझौते का कारण चीन और पाकिस्तान से सीमा पर असुरक्षा की भावना को बताया था ।

1991यह वह दौर था जब भारत और रूस के संबंधों में शिथिलता आयी  इसी समय सोवियत संघ का विघटन हुआ और भारत ने भी  मिश्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग छोड़कर निजीकरण और उदारीकरण की नीतियां अपनाई । जिसके कारण दोनों देशों ने अपने विदेश नीतियों में व्यावहारिक परिवर्तन के संकेत दिए 1990 के दशक में रूस ने अमेरिका के दबाव में आकर भारत को क्रायोजेनिक इंजन देने से मना कर दिया ।

21वीं शताब्दी में रूस और भारत के संबंधों का नया दौर शुरू हुआ ।

2000 के दशक में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण रूस की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई इसी के साथ भारत और रूस के बीच सैनिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी , सांस्कृतिक और वैश्विक मामलों में नए सिरे से संबंध स्थापित हुए ।

रूस के राष्ट्रपति पुतिन अक्टूबर 2000 भारत आये तथा भारत और रूस के सामरिक साझेदारी की घोषणा की इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए यह तय किया गया कि दोनों देशों के शीर्ष नेता प्रतिवर्ष नियमित आधार पर यात्राओं का आदान – प्रदान करेंगे। शिखर  वार्ताओं का आयोजन करेंगे तब से लेकर आज तक दोनों देश प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति एक दूसरे के यहां की यात्राएं करते आ रहे हैं । 2010 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष सामरिक साझेदारी का दर्जा प्रदान किया था ।

रूस ने किस प्रकार किया भारत का सहयोग


रूस ने भारत के विकास में सदैव ही सहयोग किया है । सैन्य क्षेत्र में अन्य उपकरणों के साथ साथ रूस ने भारत को विक्रमादित्य नामक विमान वाहक पोत की आपूर्ति की ।


2010 में दोनों देशों ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की भारत में संयुक्त उत्पादन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किया । 2018 में दोनों देशों ने अपनी तीनों सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास हेतु मंजूरी प्रदान की ।


आर्थिक मामलों में भी रूस भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार देश रहा है ।वैश्विक मामलों में रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का सदैव समर्थन किया है ।दोनों देश कई अंतरराष्ट्रीय  जैसे जी 20 ,ब्रिक्स पूर्व एशिया सम्मेलन आदि के सदस्य हैं ।


भारत शंघाई सहयोग संगठन में एक वक्राकार साझेदार देश था लेकिन रूस के सहयोग से 2017 में इस संगठन का स्थाई सदस्य बन गया यह संगठन सेंट्रल एशिया में आतंकवाद जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने का पक्षधर है ।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी रूस ने अहम भूमिका निभायी है ।  2008  चंद्रयान मिशन रूस के  सहयोग से लागू किया । भारत और रूस में 2009 में आणविक क्षेत्रों में सहयोग के लिए महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए । जिसके अंतर्गत रूस द्वारा भारत के तमिलनाडु राज्य में कुडनकुलम स्थान पर एक बड़ा परमाणु संयंत्र लगाया है ।


साथ ही रूस भारत के लिए तेल और गैस आपूर्ति का एक भरोसेमंद स्रोत है।  भारत की तेल शोध संस्था ओ. एन .जी. सी एक समझौते के अंतर्गत रूस में तेल शोधन का कार्य कर रही है ।

भारत और रूस की सामरिक साझेदारी दिनोंदिन मजबूत होती जा रही है । भारत अपनी सामरिक स्वायत्तता की नीति के चलते अमेरिका और रूस दोनों के साथ मजबूत व संतुलित सामरिक संबंधों को बनाए रखे हुए हैं जो कि भारत की महत्वपूर्ण सफलता है ।

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