लव जिहाद : धर्म के साथ मजाक

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अगर प्यार है तो फिर धर्म क्यों देखते हो ?

लव जिहाद शब्द आज कल काफी चर्चा में है । उत्तर प्रदेश में इसके कई मामले सामने आ रहे हैं । इसका उद्देश्य केवल अपने धर्म को बढ़ना है । जिसके लिए पहले मुस्लिम लड़के गैर मुस्लिम लड़कियों को प्यार में फसते है ।और फिर शादी करते हैं । और अंत में उनको धर्म बदलने के लिए बाध्य कर देते है ।

लव जिहाद :


इसी विषय पर अभी कुछ दिनों पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसला सुनाया था । जिसमें कुछ बाते प्रमुखता से कही गयी थी।
1 धर्म आस्था का विषय है । पूजा पद्धति अपने आस्था को व्यक्त करने का एक जरिया है । यदि किसी धर्म को दबाव में आकर अपनाया जाता है । उसमें आपकी आस्था नहीं है तो उससे अपनाना व्यर्थ है ।


2 अदालत ने मुगल बादशाह अकबर और जोधाबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि धर्म बदले बिना भी शादी की जा सकती है । दोनों के एक दूसरे के धर्म का सम्मान करके अपने रिश्ते को निभा सकते हैं ।


3 केवल शादी के लिए धर्म परिवर्तन कतई जायज नहीं है । शादी के लिए एक ही धर्म का एक होना जरूरी नहीं है।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने भी लव जिहाद पर विधयेक पेश किया है । जिसमें ज़बरन धर्म परिवर्तन करने पर 10 साल की सजा और 15,000 रूपये जुर्माने का प्रावधान है ।

और अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी लव जिहाद के खिलाफ उतर आया है । बोर्ड के एक्टिंग जनरल सेक्रेटरी मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने बुधवार को एक प्रेस नोटिस जारी कर मुस्लिम नौजवानों , उलेमाओं , और बच्चों के माँ बाप से कहा कि गैर मुस्लिम समुदाय में शादी करना शरीयत के खिलाफ है ।

इस्लाम धर्म ऐसी शादी को कभी स्वीकार नहीं करता है । बोर्ड में मुस्लिम नौजवानों से अपील की कि वो गैर मुस्लिम समुदाय में शादी ना करें ।

लव जिहाद अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन चुका है । किसी सामाजिक बुराई का राजनीतिक हल भला कैसे निकाला जा सकता हैं । केवल विधयेक बना देने से या अदालत के फ़ैसला सुना देने से कोई बुराई ख़त्म नहींं हो जाती ।

बुराई को समाप्त करने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने की जरूरत होती हैं । लोगों में ये समझ पैदा करने की जरूर है कि लव जिहाद प्यार नहीं धोखा है । धर्म के साथ मजाक है ।

अगर सामने वाला व्यक्ति आपसे इतना ही प्रेम करता होगा तो उसे आपके पूजा पद्धति से कोई ऐतराज नहींं होना चाहिए । अगर आप दूसरे धर्म में शादी करती है तो आपकी शादी दो धर्मों को एक साथ जोड़ने का जरिया बने ना कि अपने धर्म को छोड़ने का कारण ।

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